आंटी की चूत को कंडोम पहन कर चोदा

Hindi Sex Kahaniya आंटी की चूत को कंडोम पहन कर चोदा,, हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनुराग है। मेरी उम्र 28 साल है। मैं उत्तराखण्ड के एक छोटे से शहर में रहता हूँ। मै देखने में बहोत ही स्मार्ट हूँ। जहां भी मैं जाता हूँ वहाँ की सारी लडकियां मेरे को देखकर फ़िदा हो जाती हूँ। ईश्वर की कृपा से पर्सनालिटी भी बहोत जबरदस्त है। मै जब भी किसी लड़की को देखता हूँ। वो मेरे पीछे ही पड जाती है। अब तक मैंने कई लड़कियों की चुदाई कर उनकी चूत फाड़ी है। मेरा 6 इंच का लंड जब किसी चूत में घुसता है तो वो मम्मी मम्मी चिल्लाने लगती है। मेरी आंटी भी मुझ पर फ़िदा होकर अपनी जवानी लुटा बैठी। दोस्तों मै आपको अपने जीवन की सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ। ये बात अभी जल्दी की है। जब अपने आंटी के यहां चंडीगढ़ में गया हुआ था। मेरे को वहाँ की गोरी गोरी लडकियां बहोत ही अच्छी लग रही थी।

उसी के माहौल में आंटी भी ढली हुई थी। आंटी भी हमेशा छोटे छोटे कपडे पहन कर लौंडिया बनी रहती थी। उत्तराखंड में मम्मी साडी में रहती थी। लेकिन चंडीगढ़ में आंटी जीन्स, टी शर्ट और अलग अलग कपडे पहनती थीं। मेरा लंड आंटी को देखते ही खड़ा हो जाता था। अंकल भी थोड़ा नए जमानें के थे। वो आंटी को किसी काम को रोकते नहीं थे। आंटी को पूरी आजादी दे रखी थी। आंटी को जीन्स में देखना तो ठीक था। लेकिन एक दिन तो हद ही हो गयी। आंटी छोटे से हॉफ जीन्स का पैंट और टी शर्ट पहनकर बाहर आयी।

आंटी: अनुराग मै कैसी लग रही हूँ???
मै: (शर्माते हुए उनकी तरफ देखकर): आप जो भी पहनो अच्छी ही लगोगी!
आंटी: शुक्रिया!
मै: आंटी आप इतने छोटे कपडे पहन लेती हो! आपको कोई देखता है तो आपको शर्म नहीं आती!
आंटी: शर्म किस बात की बेटा! ईश्वर ने खूबसूरती को ढकने के लिए नहीं दी है
मै चुपचाप वहाँ से चला गया। मन कर रहा था कि भाग के उत्तराखंड चला आऊं। लेकिन उत्तराखंड में आंटी के उस रूप का नजारा कहाँ देखने को मिलता। मै रुक गया। आंटी के साथ मैं सेक्स का संबंध बनाना चाहता था। वो थोड़ी छिनाल मिजाज की लगती थीं। वो बाहर आते जाते किसी भी मर्द से बात करने लगती थी। अंकल ने भी उन्हें अपने सर पर चढ़ा रखा थी। मैं सोच रहा था! कही ये मेरे हाथ आ जाएं तो आंटी की चूत फाड़ कर उसका भरता बना डालूं।

मेरे अंकल टायर की एक कंपनी में मैनेजर थे। आंटी की जवानी को मै जितनी बारीकी से ताड़ता उतना ही निखार मालूम पड़ता था। आंटी की चूत मारने के लिए बहोत सारे लोग मोहल्ले में तैयार थे। वो भी चुदने को व्याकुल लगती थी। मेरे को कभी कभीं उनका गैर मर्द के साथ संबंध लगता था। मोहल्ले वालों में कई लोगो के साथ आंटी का संबंध पता चल रहा था। अंकल अपने काम पर चले जाते थे तो पूरा दिन वो यही सब करती रहती थी। मै भी सोचने लगा बहती गंगा में मै भी हाथ धो लूं। मै उनके करीब ही रहने लगा। उनका बाहर जाना भारी पड़ने लगा। मेरे को पता था आंटी को चुदाई की तङप ज्यादा देर तक बर्दाश्त नही हो पाएगी। वो कुछ भी करे बस मेरे को उनके हर एक काम पर निगाह रखनी थी। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम..

मैं भी खुफ़िया एजेंट की तरह उनके आगे पीछे लगा रहता था। दो चार दिन बीत गए। आंटी को चुदने का जुगाड़ नहीं लग पा रहा था। आंटी मेरे को बहाने बताया करती थी। एक दिन आंटी मार्केट जाने का बहाना करके जा रही थी। मै घर पर अकेला ही था। पूरी तरह से घर खाली था। आंटी को लगा मैं घर छोड़कर कही नहीं जाऊँगा। वो बाहर निकल गयी। उनके निकलते ही मैंने भी घर को ताला लगाया। वो कुछ दूर गली में जाकर मुड़ गयी। मैं पीछे पीछे चुपके से सब देख रहा था। अचानक उसी गली में से एक मर्द ने दरवाजा खोला और आंटी जल्दी से अंदर हो ली। मै चला आया। वो लगभग एक घंटे बाद घर पर आयी।

मै: मार्केट से आ गयी आंटी??
आंटी: हाँ
मै: कब मार्केट गयी ही थी आप??
आंटी: क्या कह रहे हो?? मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा
मै: मैंने आपको उस मर्द के साथ उसके घर में घुसते देखा था

आंटी: क्या कह रहे हो तुम??
मै: बहाना बनाना बंद करो प्यारी आंटी जी
तभी अंकल आ गए। आंटी को डर था कि कही मै अंकल से सब बात बोल ना दूं।
अंकल: क्या बात चल रही है??

मैं: कुछ नहीं अंकल हम लोग घर के बारे में बात कर रहे थे
अंकल को किसी पार्टी में जाना था। वो तैयार होकर जानें लगे। वो रात में काफी देर से आने वाले थे। उनके घर से बाहर निकलते ही आंटी मुझसे लिपट गयी।
आंटी: थैंक यू अनुराग! तुमने कुछ बताया नहीं

फिर उन्होंने मेरे को सब सच बताने लगी। अंकल की और जिस मर्द के साथ मैंने देखा था। उनसे झगड़ा था। उस मर्द की बीबी आंटी की फ्रेंड थी। उसी से मिलने गयी हुई थी। मै बेकार में ही आंटी को गलत समझ बैठा था। आंटी के दोनो चुच्चे मेरी पीठ में लग रहे थे। उनके कोमल चुच्चे एक एहसास अपनी पीठ पर करके बहोत ही खुश हो रहा था। आंटी जान बूझकर बार बार अपने चुच्चे को मेरी पीठ में लगा रही थी। वो भी मेरे से चुदना चाहती थी। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम

मै: आंटी आपके मम्मे और गांड बहोत ही अच्छे लग रहे हैं

आंटी ने जैसे ही मेरे को छोड़ा मै दौड़कर बाथरूम में मुठ मारने को चला गया। वहाँ पर टंगी उनकी ब्रा से खेल खेल कर खूब मुठ मारा। आंटी बाथरूम के दरवाजे पर हो खड़ी थी। मैने ब्रा रस्सी पर टांग कर बाथरूम का दरवाजा खोला। उनकी ब्रा हिल रही थी। वो समझ गयी की बच्चे ने खेल के रखा है।

आंटी: इस ब्रा और पैंटी में क्या रखा है। खेलना है तो मेरे साथ खेलो। जो मजा मेरे साथ खेलने में हैं वो उसमें कहाँ! मेरे तो जैसे भाग्य ही खुल गए हो। मै ख़ुशी से उछल पड़ा। आंटी मेरे को देखकर मुस्कुरा रही थी।

आंटी: चलो मै तुम्हे अपनी चूत के दर्शन कराती हूँ । तुम ही देखकर बताओ आज चुदी है या नहीं! इतना कहकर मेरे को वो अंकल के रूम में ले गयी। आंटी ने आलमारी खोली और उसमे से कंडोम निकाल कर देने लगी।

आंटी: चूत में डालने से पहले पहन लेना। तेरे को चुदाई के सारे स्टेप पता तो है ना!
मै : हाँ आंटी

आंटी बिस्तर पर बैठ गयी। पहली पहल मैंने अपने ओर से की। आंटी के होंठो पर सजी हुई लाल रंग की लिपस्टिक को छुड़ाने लगा। उनके लाल रंग की लिपस्टिक को देखते ही मैं उनके होंठ को पीने लगा। अब मैं उन्हें देख रहा था। कुछ देर तक होंठ पीने के बाद मैंने अपना मुह उनके मुह से हटा लिया। आंटी के होंठ लाल लाल खून की तरह हो गए। मै उनकी चूचो को देख रहा था।

आंटी: शाम को तो बहुत बोल रहे थे कि मेरी गांड और मम्मे तुझे अच्छे लगते हैं। अब मौका मिला है। तो क्या बस देखते ही रहोगे कि कुछ करोगे भी? मैं आंटी के मुह से गांड और मम्मे शब्द सुन कर हैरान हो गया।

मैं: अब तो आंटी! आप बस देखती जाओ!
आंटी ने उस दिन साडी और ब्लाउज पहन कर देसी औरत बनी हुई थी। मैंने पहले उनकी साड़ी निकाली। फिर पेटीकोट का नाडा खींच कर उसे निकालने लगा। तो नाड़े की गाँठ मुझे समझ में नहीं आई।

मेरी परेशानी समझ कर आंटी ने खुद ही नाड़ा खोल कर अपना पेटीकोट निकाल दिया। इसके बाद मैंने आंटी का ब्लाउज निकाल दिया। फिर आंटी की ब्रा पेंटी के साथ में मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया। अब हम दोनों आंटी भतीजे एक दूसरे से लिपट गए। फिर क्या था मैं उनके मम्मों को एक हाथ से दबा रहा था। मै उनके मम्मो को किस किए जा रहा था। वो जोर जोर से “……अई…अ ई….अई……अई….इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारियां निकालने लगी। दूसरा हाथ आंटी की चूत में डाल रखा था। मुझे किस करने मे और बूब्स चूसने में बड़ा मज़ा आता है। मैं उन्हें पागलों की तरह किस किए जा रहा था। मेरी आंटी भी मेरे साथ पूरा सहयोग कर रही थीं।

प्यारी आंटी के दोनों हाथ मेरी पीठ पर थे। दस मिनट तक आंटी को किस करने के बाद मैंने उनकी चूत की दरार में अपनी जीभ को घुसा दिया। आंटी एक दम से तड़प उठी थीं। वो मेरे को दबाते हुए “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की आवाज निकाल रही थी।

आंटी: अब किसिंग सकिंग ही करोगे कि चोदोगे भी? मैं ज़्यादा टाइम तक नहीं रुक पाऊँगी… अंकल आने वाले ही होंगे ? अब और कितना तड़पाओगे??
मै: ओके आंटी बोलकर उनकी चूत में अपना लंड रगड़ते आंटी को कुछ देर तक गर्म किया

उसके बाद आंटी का दिया हुआ कंडोम मैंने अपने लिंग पर चढ़ा लिया। आंटी की चूत की छेद से सटाकर धक्का लगाया। मेरा मोटा लंड अभी आंटी की चूतत में अभी थोड़ा सा ही अन्दर गया था।

आंटी( तड़पते हुए): अनुराग धीरे डाल.. मेरी जान निकालेगा क्या?

मैंने देखा कि आंटी की आँखें दर्द से लाल हो गई थीं। वो जोर जोर से “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की चीखें निकाल रही थी। वो थोड़ा गुस्से में भी दिख रही थीं। शायद एकदम से लंड पेलने से आंटी की चूत में कुछ ज्यादा ही दर्द हो गया था। मैं रुक गया और उन्हें किस करने लगा। कुछ देर बाद उन्होंने अपनी गांड उठा कर इशारा किया। मैं समझ गया कि अब दर्द कम हो गया है। इस बार मैंने देर ना करते हुए पूरा लंड आंटी की चूतत में घुसेड़ दिया। मेरे होंठ उनके होंठों पर ढक्कन की तरह चिपके थे। इस वजह से आंटी कुछ बोल भी नहीं पा रही थीं। जैसे ही पूरा लंड उनकी चुत में अन्दर गया, वो छटपटाते हुए मुझे मारने लगीं। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम

आंटी: धीरे धीरे कर न..

मैंने आंटी को चोदना चालू किया। तो आंटी ने अपने पैरों से मुझे जकड़ लिया। उनकी चूत में दर्द होनें लगा। वो अपने पैरों से मेरे पैर को मरोड़ रही थी। थोड़ी देर बाद जब मेरा दर्द कम हुआ तो वो किस करते हुए आहें भरने लगीं। वो जोर जोर “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाजो के साथ चुदवाने लगी। फिर क्या था अपनी रेल तो निकल पड़ी। अब आंटी को भी मज़ा आ रहा था। मेरे को भी मजा आ रहा था। आंटी अपनी कमर उछाल उछाल कर चुदवा रही थी। आंटी के चुदने का अंदाज बड़ा ही अच्छा लगा।

जी करता था आंटी को रोज चोदूं! आंटी की और मेरी स्पीड अचानक से तेज होने लगी। कुछ टाइम बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए। मै आंटी के चूत के अंदर कंडोम में ही झड़ गया। धीरे से कंडोम सहित लंड को निकाल कर आंटी की चूत को फ्री कर दिया। अब तक रात के 2 बज गए थे। अंकल देर से आये हुए थे। मेरा गांड चुदाई करने का सपना अधूरा ही रह गया। अब उस रात और तो कुछ नहीं हो पाया। आंटी अपने कपड़े पहन कर अपने रूम में चली गईं। अंकल ने गाड़ी खड़ी करके दरवाजे को नॉक किया। आंटी झूठ मूठ का सोने का नाटक करते हुए दरवाजे को खोलने चली गयी। उस रात आंटी के साथ गुजारा गया वक्त आज भी मेरे को याद है। सुबह मेरी आदत है कि मैं देर तक सोता हूँ।हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम..
इसलिए कोई उठाने भी नहीं आता है. सुबह नौ बजे के करीब आंटी मेरे कमरे में झाड़ू लगाने आईं। तब उन्होंने ही मुझे जगाया। मैं उन्हें बांहों में पकड़ कर किस करने लगा। वो मुझसे खुद को छुड़ा कर निकल गईं। आंटी मुस्कुरा कर मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में दबा दी। मेरा तो दिल बाग़ बाग़ हो गया। अक्सर सुबह के वक्त मेरा लंड खड़ा रहता है। अंकल अपने ऑफिस चले गए थे। मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटाकर उसी वक्त उनकी गांड चोदने का सपना पूरा कर लिया। आंटी की गांड चोद कर उस दिन सुबह की शुरूवात की। उस दिन से अब तक मै आंटी के साथ हर दिन सेक्स का मजा लेता हूँ। मै भी यहां चंडीगढ़ में ही सैटल हो गया। अब मैं आंटी के साथ हर दिन सम्भोग का मजा लेता हूँ।


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